Ticker

6/recent/ticker-posts
1 / 1

जबेरा से धर्मेंद्र को भाजपा टिकिट के बाद ऋषि पर निगाहें.. तान्या की निर्दलीय दावेदारी ने चौंकाया..

भाजपा की दूसरी सूची में धर्मेंद्र सिंह सामने आए-
दमोह। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की भाजपा प्रत्याशियों की दूसरी सूची में घोषित नामों में एक और चौंकाने वाला नाम दमोह जिले से जबेरा क्षेत्र के प्रत्याशी के तौर पर धर्मेंद्र सिंह का सामने आया है। इसके पूर्व भाजपा की पहली सूची में हटा क्षेत्र से पीएल तंतुबाय के नाम की घोषणा ने सभी को हैरत में डाल दिया था।
भाजपा द्वारा दूसरी सूची में दमोह जिले के जबेरा क्षेत्र से युवा कर्मठ मिलनसार छवि के धनी और अपने पिता के कदम पर आगे बढ़ रहे धर्मेंद्र सिंह लोधी को पार्टी टिकट देकर सभी को चौंका दिया है। धर्मेंद्र सिंह द्वारा लंबे समय से भाजपा टिकट की दावेदारी के साथ चुनाव की तैयारियां की जा रही थी। परंतु उनको इतने जल्दी टिकट मिल जाएगी इस बात का भरोसा शायद उन्हें स्वयं भी नहीं होगा।
भाजपा के जिला महामंत्री के तौर पर जिस तरह से धर्मेंद्र सिंह की एंट्री ने सभी को चौंकाया था ठीक उसी तरह जबेरा क्षेत्र से भाजपा टिकट मिलने पर सभी हैरत में पढ़ते नजर आए हैं। हालांकि भाजपा के जिला महामंत्री पद की तरह विधानसभा की टिकट भी उन्हें खुद से अधिक अपने पिता की मेहनत और संपर्क के बदौलत हासिल हुई है।
याद दिला दे की धर्मेंद्र के पिता भावसिंह मासाब लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय समर्पित संघ कार्यकर्ता के तौर पर भाजपा के लिए सतत संपर्कसील और स्वयं की टिकट के लिए प्रयासरत रहे। उमा भारती के खास समर्थक माने जाने वाले भाव सिंह शिक्षक की नौकरी से इस्तीफा देकर 2008 का चुनाव उमा जी की जनशक्ति पार्टी से जबेरा से लड़ चुके है।
उमा जी के साथ भाजपा में वापसी करने वाले भाव सिंह को जब जिला भाजपा संगठन में जगह दी जा रही थी तब उन्होंने 2015 में अपनी जगह अपने बेटे धर्मेन्द्र को नामांकित करा दिया था। उस समय किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि जिस बेटे को पिता की जगह भाजपा का जिला महा मंत्री बनाया गया है वह आने वाले समय में भाजपा से विधान सभा की टिकट भी हासिल कर लेगा।
अनेक महारथियो को पछाड़कर टिकिट हासिल की-
धर्मेंद्र सिंह लोधी ने विधानसभा की भाजपा यह टिकट अनेक महारथीयों को पीछे छोड़ते हुए हासिल की है। उनके सबसे नजदीकी टिकट दावेदार के तौर पर जिला पंचायत सदस्य राघवेंद्र सिंह ऋषि लोधी का नाम चल रहा था। जिनकी टिकट कटवाने के लिए भाजपा नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल द्वारा जारी किया गया वह पत्र असर दिखाता नजर आया जिसमें उन्होंने अपने चुनाव के दौरान राघवेंद्र सिंह के विरोध में काम करने की शिकायत की थी।
पूर्व सांसद पूर्व विधायक, पूर्व मंत्री को पीछे छोड़ा-
क्षेत्र से जबेरा क्षेत्र से भाजपा टिकट की दौड़ में पूर्व विधायक और राज्य मंत्री दशरथ सिंह लोधी तथा पूर्व विधायक और सांसद रहे चंद्रभान सिंह मुख्य प्रतिद्वंदी थे इसके बावजूद चंद्रभान सिंह को दल बदल करने के बाद पार्टी में वापस आए ज्यादा समय नहीं होने तथा दशरथ सिंह को लेकर लोगों के पुराने शिकवा शिकायतें कम नही होने जैसे हालात के चलते धर्मेंद्र सिंह लोधी को भाजपा की टिकट हासिल करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
संघ  सांसद और  संगठन का सपोर्ट आया काम में-
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती और सांसद प्रहलाद पटेल के अलावा संघ और संगठन की सपोर्ट की बदौलत भाव सिंह अपने बेटे धर्मेंद्र सिंह के लिए भाजपा की टिकट लाने में कामयाब रहे हैं। मासाब जब स्वयं जनशक्ति पार्टी से चुनाव में खड़े हुए थे उस समय उन्हें भले ही करीब 3000 वोट हासिल हुई थी परंतु भाजपा प्रत्याशी दशरथ सिंह 1500 वोट के मामूली अंतर से चुनाव हार गए थे। ऐसे में अब दशरथ सिंह को मनाना और साथ लाना चुनौती होगा। 
तान्या सालोमन बना सकती है राह को आसान-
2008 के विधानसभा चुनाव में भाव सिंह मासाब ने जनशक्ति पार्टी से चुनाव लड़कर तत्कालीन कांग्रेस प्रत्याशी रत्नेश सालोमन की राह को आसान कर दिया था। अब उनकी बेटी तान्या ने अब निर्दलीय नामांकन पत्र भरकर अपने पिता का कर्ज चुकाने जैसे हालात निर्मित कर दिए हैं। बता दें कि पूर्व में कांग्रेस टिकट पर चुनाव लड़ चुकी तान्या सालोमन ने आज ही निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन पत्रर जमा किया है। इसकेे पूर्व इनके भाई आदित्य ने कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर नामांकन भरा था। परंतुुु कांग्रेस ने प्रताप सिंह टिकट घोषित कर दी। जिसके बाद तान्या ने बगावती तेवर दिखा दिए हैं।
इधर भाजपा टिकिट से वंचित ऋषि लोधी के निर्दलीय तौर पर नामांकन की चर्चाएं शुरू हो गई है। यदि ऐसा होता है तो फिर तान्या और ऋषि की निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में मौजूदगी भाजपा कांग्रेस प्रत्याशी के लिए नींद उड़ाने वाली साबित होगी। पल पल बदलते चुनाव की राजनीतिक समीकरणों के हालात की समीक्षा को लेकर फिर मिलते है।  अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट

Post a comment

0 Comments