लाल बत्ती लगी गाड़ी से कलेक्ट्रेट पहुंचे तहसीलदार
दमोह। सरकारी अधिकारियों के वाहनों पर लाल बत्ती के इस्तेमाल को लेकर शान द्वारा अलग से गाइडलाइन निर्धारित की गई इसके बावजूद लाल बत्ती का मोह अधिकांश अधिकारियों से नहीं छूटता तथा वह निजी उपयोग या मीटिंग आदि में गाड़ी का उपयोग करते समय भी लाल बत्ती किसान बताने से नहीं चूकते हैं ऐसा ही एक मामला दमोह कलेक्ट्रेट कार्यालय में देखने को मिला जब एक तहसीलदार की गाड़ी पर लाल बत्ती का उपयोग होता देखकर मीडिया ने सवाल किया तो उन्होंने गाड़ी से लाल बत्ती हटवाने में देर भी नहीं की.
यह पूरा घटनाक्रम बटियागढ़ तहसीलदार की सरकारी गाड़ी पर लाल बत्ती लगी होने का सामने आया है। कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंची उनकी गाड़ी में पुलिस की तरह लाल बत्ती लगी हुई थी.. लाल बत्ती के इस्तेमाल को लेकर सवाल किया गया कि उन्हें वाहन पर लाल बत्ती लगाने की अनुमति है, तो उन्होंने कहा कि “हमें तो मालूम ही नहीं है कि लाल बत्ती लगा सकते हैं या नहीं।”इसके बाद तहसीलदार ने खुद अपनी गाड़ी से लाल बत्ती तुरंत निकाल ली और उसे गाड़ी के अंदर रख दिया। मौके पर मौजूद लोगों के लिए यह पूरा घटनाक्रम चर्चा का विषय बन गया।
अब सवाल यह है कि जब लाल बत्ती लगाने की अनुमति को लेकर अधिकारी स्वयं स्पष्ट नहीं थे, तो सरकारी वाहन पर लाल बत्ती लगाई ही क्यों गई थी? क्या वाहन में लाल बत्ती लगाने के संबंध में कोई आधिकारिक अनुमति या आदेश था? हालांकि तहसीलदार महोदय को मजिस्ट्रेट जैसे पावर विशेष अवसरों पर प्राप्त रहते हैं तथा वह पुलिस के साथ लाइन ऑर्डर की कंडीशन में लाल बत्ती का उपयोग करते रहते हैं लेकिन बटियागढ़ से दमोह आने के दौरान आखिर लाइन ऑर्डर की ऐसी कौन सी कंडीशन थी जो महोदय लाल बत्ती लगे कलेक्ट्रेट पहुंचे थे.. हालांकि तहसीलदार महोदय ने मीडिया की बात को तत्काल संज्ञान में लेकर गाड़ी से लाल बत्ती हटवाली इस वजह से यह मामला यहीं खत्म हो जाता है लेकिन फिर भी खबर तो बनती है.. कलेक्ट्रेट में मौजूद एक साथी पत्रकार की कलम से


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