कलेक्टर ने पकड़ी सीमेंट फैक्ट्री में अनियमिताए
दमोह। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने आज नरसिंहगढ़ स्थित हेडलवर्ग सीमेंट फैक्ट्री का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान श्रमिकों से बातचीत में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। कलेक्टर ने कहा कि शासन द्वारा निर्धारित कलेक्ट्रेट रेट के अनुसार श्रमिकों को भुगतान नहीं किया जा रहा है तथा उनसे निर्धारित 8 घंटे से अधिक कार्य कराया जा रहा है। साथ ही ओवरटाइम का डबल भुगतान भी नहीं दिया जा रहा है।
सुरक्षा उपकरण एवं मूलभूत सुविधाओं का अभाव.. निरीक्षण के दौरान श्रमिकों ने बताया कि उन्हें हेलमेट सुरक्षा जूतेए चश्मे सहित आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं और उन्हें अपने खर्च पर ये सामग्री खरीदनी पड़ रही है। इसके अतिरिक्त श्रमिकों को वेतन पर्ची नहीं दी जा रही है तथा भोजन करने के लिए उचित स्थान की भी व्यवस्था नहीं है। कलेक्टर श्री यादव ने कहा श्रमिकों का भुगतान एकमुश्त और समय पर किया जाना चाहिए जबकि वर्तमान में उन्हें किस्तों में भुगतान किया जा रहा है तथा कटौती भी की जा रही है। इन सभी मामलों में श्रमिकों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और संबंधित प्रबंधन के खिलाफ केस रजिस्टर कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
कार्यस्थल दुर्घटना में उपचार न कराने पर जताई नाराजगी.. निरीक्षण के दौरान एक श्रमिक ने बताया कि कार्य के दौरान दुर्घटना में उसके छह दांत टूट गए थे लेकिन कंपनी द्वारा उसका उपचार नहीं कराया गया। इस पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कार्यस्थल पर हुई दुर्घटना की स्थिति में श्रमिक का उपचार कंपनी की जिम्मेदारी है।
श्रम विभाग को नियमित निगरानी के निर्देश.. कलेक्टर श्री यादव ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि समय.समय पर निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि शासन के सभी निर्देशों का पालन हो रहा है। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग के नियमों के अनुसार आवश्यक सूचना बोर्ड लगाए जाना अनिवार्य है जो फैक्ट्री परिसर में नहीं पाए गए।
स्थानीय श्रमिकों को प्राथमिकता देने की बात.. कलेक्टर श्री यादव ने कहा कि शासन की प्राथमिकता स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है। हालांकि तकनीकी और विशेषज्ञता वाले कार्यों के लिए बाहर के श्रमिकों की आवश्यकता पड़ सकती हैए फिर भी स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होने कहा शासन श्रमिकों के हितों के प्रति संवेदनशील है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक श्रमिक को उसका वैधानिक अधिकार मिले तथा फैक्ट्री परिसर में श्रम कानूनों का पूर्णतः पालन हो।


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