Ticker

6/recent/ticker-posts

श्रीराम के जीवंत जीवन वृतांत से त्रेतायुग की दिव्य कथा का साक्षी बना नोहलेश्वर महोत्सव.. सुप्रसिद्ध कलाकार पुनीत इस्सर व 150 कलाकारों की टीम की जीवंत प्रस्तुति ने वाहवाही लूटी...

नोहलेश्वर महोत्सव से सेवा, संस्कार और समर्पण की प्रेरणा पूरे देश में पहुंचे- मंत्री धर्मेन्द्र सिंह 

दमोह। संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेन्द्र सिंह लोधी के मार्गदर्शन में महोत्सव संयोजक सत्येंद्र सिंह के नेतृत्व में नोहटा धाम में आयोजित पावन नोहलेश्वर महोत्सव 2026 का आठवां दिवस भक्ति, संस्कृति और शिक्षा सेवा के अद्भुत समन्वय का साक्षी बना। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान श्री गणेश जी की विधिवत पूजा-अर्चना एवं चरण वंदना के साथ हुआ, जिसके पश्चात भव्य सांस्कृतिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला प्रारंभ हुई।
रामायण का जीवंत मंचन, दर्शक हुए मंत्रमुग्ध.. इस अवसर पर देश के सुप्रसिद्ध कलाकार पुनीत इस्सर की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष आयाम प्रदान किया। लगभग 150 कलाकारों की विशाल टीम ने मंच पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के जीवन का अत्यंत प्रभावशाली और जीवंत चित्रण प्रस्तुत किया। भगवान श्रीराम के जन्म से लेकर वनवास, रावण वध और अयोध्या आगमन तक की प्रमुख घटनाओं का मंचन भावपूर्ण शैली में किया गया। भव्य परिधान, सजीव संवाद और आकर्षक मंच सज्जा ने दर्शकों को त्रेतायुग की दिव्य कथा का साक्षी बना दिया। पुनीत इस्सर के निर्देशन और अभिनय ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए और तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा परिसर गूंज उठा।
राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार धर्मेन्द्र सिंह ने कहा कि नोहलेश्वर महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि ‘समग्र विकास’ की एक सशक्त पहल है, जहां भक्ति के साथ-साथ शिक्षा, संस्कार और सामाजिक जागरूकता का संदेश दिया जा रहा है। हमारा स्पष्ट लक्ष्य है कि क्षेत्र का प्रत्येक बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़कर आत्मनिर्भर और सक्षम नागरिक बने। साथ ही नवोदय कोचिंग, स्मार्ट क्लासेस और नि:शुल्क पुस्तकालय जैसी पहलें केवल योजनाएं नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन के मजबूत स्तंभ हैं। हम ‘विकसित क्षेत्र – सशक्त युवा’ के संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। जब शिक्षा और संस्कृति का समन्वय होता है, तभी समाज में सकारात्मक परिवर्तन आता है। नोहटा धाम को हम एक आदर्श आध्यात्मिक, शैक्षणिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में यह महोत्सव प्रदेश ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाए और यहां से सेवा, संस्कार और समर्पण की प्रेरणा पूरे देश में पहुंचे।
महोत्सव संयोजक सत्येंद्र सिंह ने कहा कि महोत्सव के मंच से सामाजिक सरोकारों को भी प्रमुखता दी गई। कृष्णभाव फाउंडेशन के तत्वावधान में विधानसभा क्षेत्र में संचालित नि:शुल्क नवोदय कोचिंग में निस्वार्थ भाव से सेवाएं दे रहे शिक्षकों एवं सहयोगी पालकों का सम्मान किया गया।
यह केवल एक सम्मान समारोह नहीं, बल्कि शिक्षकों के समर्पण, सेवा और आत्मीयता का उत्सव था। सत्र 2024-25 में जहां 13 स्थानों पर कक्षाएं संचालित हो रही थीं, वहीं सत्र 2025-26 में इसे बढ़ाकर 36 स्थानों तक पहुंचा दिया गया है। संकल्प लिया गया कि आने वाले समय में 100 से अधिक नि:शुल्क कक्षाओं का संचालन कर क्षेत्र के प्रत्येक जरूरतमंद विद्यार्थी तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाई जाएगी।
नवोदय कक्षाओं के साथ-साथ स्मार्ट क्लासेस के माध्यम से छात्र-छात्राओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की बेहतर तैयारी कराई जा रही है। तेंदूखेड़ा में नि:शुल्क “विद्या समय” पुस्तकालय का शुभारंभ किया गया है तथा शीघ्र ही जबेरा में भी पुस्तकालय प्रारंभ किए जाने की घोषणा की गई। पूरे आयोजन में अनुशासन, श्रद्धा और सामाजिक प्रतिबद्धता का अद्भुत संगम देखने को मिला। नोहलेश्वर महोत्सव का यह दिवस न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध रहा, बल्कि शिक्षा, संस्कार और सेवा भावना के संदेश के साथ समाज को नई दिशा भी दे गया। नोहटा धाम एक बार फिर भक्ति, परंपरा और सामाजिक उत्तरदायित्व के संगम का प्रेरणादायी केंद्र बनकर उभरा।

Post a Comment

0 Comments