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पंच कल्याणक महोत्सव के चौथे दिन तप कल्याणक.. महाराज आदि कुमार को नीलांजन नृत्य देखकर हुआ वैराग्य.. आचार्यश्री के आर्शीवाद से चोपरा पंच कल्याणक महोत्सव

 दमोह। जबेरा जनपद के चोपरा चौबीसा में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की आशीर्वाद और मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी महाराज के सानिध्य में 21 से 26 अप्रैल तक पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन चल रहा। जिस के चौथे दिन तप कल्याणक क्रियाएं संपन्न कराई गई इस दौरान नीलांजना नृत्य देखकर महाराज आदि कुमार को वैराग्य की प्रस्तुति देखकर दर्शकों की आंखें नम होती नजर आई..

चोपरा में चल रहे 1008श्री मज्जिनेंद्र मानस्तम्भ जिनबिंब पंचकल्याणक एवम प्राण प्रतिष्ठा महामहोत्सव प्रतिष्ठाचार्य ब्रम्ह. सुमत भैया भोपाल एवं प्रतिष्ठा वाचस्पति डॉ.पंडित अभिषेक जैन शिक्षाचार्य सगरा वालो के निर्देशन में चल रहा है। रविवार को वर्तमान चौबीसी के चौबीस तीर्थंकर व जैन धर्म के प्रथम संस्थापक श्री आदिनाथ का  तप कल्याणक बड़े हर्षोल्लास के साथ संपादित हुआ। प्रातः काल जिनेन्द्र प्रभु का अभिषेक, शांतिधारा तदुपरांत नित्य मह पूजन के बाद जन्म कल्याणक की पूजा संपन्न हुई। पूज्य मुनि श्री की दिव्य देशना के बाद शांति विसर्जन हुआ।

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महाराजा नाभिराय के महल में युवराज आदि कुमार के विवाह की रस्में पूरी की गई। जिनका विवाह महा कच्छ राज्य की दिव्य कन्या नंदा और सुनंदा से परिणय हुआ।  महिला पात्रों ने नाचते झूमते गाते हुए मंगल गीत गाए और एक दूसरे को विवाह की बधाइयां दी।इसके बाद महाराजा नाभिराय का का दरबार सजाया गया।आदि कुमार का राज्याभिषेक हुआ। महाराजा आदिकुमार प्रजा के असी ,मसी, कृषि, विद्या,  वाणिज्य और कला का ज्ञान  प्रजाजन को दिया।  समाज में चार वर्णों की स्थापना करके क्षत्रिय, ब्राह्मण, वैश्य और शुद्र एवं प्रजा को उनके वर्ण के अनुसार आजीविका यापन करने का एवं अपने वर्ण में शादी विवाह आदि का संदेश दिया। उसके बाद देवी निलांजना के नृत्य देख महाराज आदिनाथ को वैराग्य हो जाता है।

जिसकी अनुमोदना करने के लिए सारस्वत आदि लौकांतिक देव पंचम स्वर्ग से आते है। उसके बाद राज्य पाट को भरत बाहुबली को सौंपकर दीक्षा बन के लिए प्रस्थान होता है। उसके पूर्व माता मरूदेवी का अंतिम आशीर्वाद लेकर  व संबोधन देकर दीक्षा वन की और गमन कर जाते है पूज्य मुनि श्री प्रबुद्ध सागर  जी के कर कमलों से विधिनायक बिम्ब पर दीक्षा के संस्कार किए जाते है।उनको दिक्षोचित उपकरण पिच्छी व कमंडल प्रदान किए जाते है ।उनका नामकरण किया जाता है वही शेष प्रतिष्ठेय । प्रतिमाओ के दीक्षा के संस्कार भी किए जाते है।  पूज्य श्री की दिव्य देशना भी संपन्न हुई । तथा डॉ .अभिषेक जैन ने बताया कि कल  मुनि वृषभनाथ की आहारचर्या संपन्न होगी व दोपहर में उनको केवल ज्ञान होगा । कुबेर द्वारा समवशरन  की रचना होगी।

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 दीक्षा के पावन अवसर पर नर - नारी मंगल गीतों पर झूमते, नाचते-गाते  भगवान के दीक्षा की खुशियां मना रहे थे। भगवान आदिनाथ के तप कल्याणक में जैन धर्मावलंबियों का आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा।महोत्सव में विभिन्न राज्यों के जैन धर्मालंबी एकत्रित होकर पंचकल्याणक महोत्सव में बह रही धारा में गोते लगा रहे  आज बड़ी संख्या में बारात में शामिल हुए अभिषेक जैन खुरई विनोद मलैया जबेरा देवेंद्र जैन छोटी कटंगी राजेश जैन दमोह अनिल जैन महिला बाल विकास परियोजना अधिकारी रीवा एवं ग्राम बनवार घटेरा सगरा पर स्वाहा कुंडलपुर खमरिया मौजी लाल जबेरा अभाना नोहटा से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए।

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