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कलेक्टोरेट केंपस में भी सुरिक्षत नहीं है वाहन.. खनिज विभाग द्वारा पकड़ीगईगाड़ियों से बैटरी, डीजल, टूल बाक्सचोरी..

 दमोह देहात थाना क्षेत्र अंतर्गत सागर जबलपुर बाईपास से लेकर मड़ाहार राजनगर मार्ग पर पहाड़ों को खनन करके रात के अंधेरे में मुरम का परिवहन लंबे समय से किया जा रहा है इधर नरसिंहगढ़ बटियागढ़ सादपुर बांदकपुर घाट पिपरिया क्षेत्र में अवैध रूप से मोरम के खनन से पहाड़ों के बड़े बड़े हिस्से गायब हो चुके हैं। वही कार्रवाई के नाम पर जब कभी खनिज विभाग द्वारा ट्रैक्टर डंपर आदि को पकड़कर कलेक्ट्रेट स्थित खनिज परिसर में लाया जाता है तो सीधे जुर्माना की कार्रवाई के बजाय कई दिनों तक वाहन मालिकों को चक्करलगवाए जाते हैं..

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दमोह कलेक्ट्रेट जैसा संवेदनशील परिसर भी अब चोरों से सुरक्षित नहीं बचा है। यहां पर अवैध खनन परिवहन के मामले में पकड़े जाने वाले वाहनों से बैटरी डीजल टूलबॉक्स आदि चोरी चले जाने का घटनाक्रम सामने आया है जिसको लेकर अब अधिकारी कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। खनिज विभाग द्वारा पिछले सप्ताह रेत से भरे कुछ ट्रेक्टर तथा डंपर आदि को पकड़कर जप्त किया गया था। उसके बाद खनिज अधिकारी 5 दिन की ट्रेनिंग पर भोपाल चले गए थे और वाहन मालिक अपनी गाड़ियों को छुड़वाने के लिए खनिज विभाग कार्यालय के चक्कर लगाते रहे थे।

 

सोमवार को खनिज अधिकारी के ऑफिस पहुंचने के बाद अनेक वाहन को जुर्माने के बाद छोड़ने की कार्रवाई की गई। इस दौरान वाहन चालकों ने जैसे ही हाईवा डंपर ट्रेक्टर आदि को स्टार्ट करना चाहा तो उनकी बैटरी से लेकर टैंक से डीजल तक गायब था यहां तक की कुछ गाड़ियों के टूल बॉक्स आदि भी गायब हो चुके थे इसको लेकर जब खनिज अधिकारी को जानकारी दी गई तो उनका कहना था कि इसकी जिम्मेदारी उनकी नहीं थी वाहन मालिकों को या चालकों को हो देश की सुरक्षा करना थी। जिसके बाद मीडिया के समक्ष अपना दुखड़ा रोते वाहन मालिक और चालक डीजल बैटरी का इंतजाम करते नजर आए। जबकि इस मामले में खनिज अधिकारी कुछ भी कहने से बचते हुए नजर आए उनका कहना था कि यदि कोई अधिकृत बयान लेना है तो कलेक्टर साहब से जा कर लिया जाए।
उल्लेखनीय है कि पूर्व में रहे खनिज अधिकारी रवि पटेल के कार्यकाल की तरह ही पहाड़ों के खनन से लेकर रेल परिवहन के हालात बने हुए हैं जब कभी किसी सूचना पर खनिज अधिकारी कार्रवाई करने के लिए निकलते हैं तो उसके पहले उनके ही विभाग के कुछ कर्मचारी संबंधितो को सतर्क करने से नही चूकते है। वही  पुलिस द्वारा जब कभी पोकलेन डंपर आदि पकड़े जाते है तो इनके छूटने में भी देर नहीं लगती। वही पुलिस मामलों में खनिज विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई के बजाए पुलिस के प्रतिवेदन आने के बाद कार्रवाई की बात की जाती है। इसी का नतीजा है कि विभिन्न क्षेत्रों में निर्माणाधीन कॉलोनीयो में रात के अंधेरे में मोरम की भराई शुरू हो जाती है। इसी कड़ी में हटा नाका क्षेत्र में एक कॉलोनी में रात भर बाईपास के जरिए मोरम के पहुंचने का सिलसिला बेरोकटोक जारी है। जिसे देहात थाना पुलिस और खनिज विभाग की रजामंदी के बिना होना संभव नहीं कहा जा सकता.. पिक्चर अभी बाकी है..

  

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