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कांग्रेस विधायक अजय टंडन ने भाजपा की करारी हार के लिए मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष को जिम्मेदार बताया.. कोरोना काल में कलेक्टर एसपी के तबादलों पर सवाल उठाए.. इधर भाजपा नेता रमन खत्री, कपिल सोनी ने प्रदेश संगठन से निर्णय पर पुर्नविचार की अपील की...

 कोरोना काल में कलेक्टर एसपी के तबादलों पर सवाल..

दमोह। विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी की जबरदस्त जीत और भाजपा की करारी हार के बाद शुरू हुई प्रशासनिक सर्जरी और भाजपा के वरिष्ठ नेता जयंत मलैया को कारण बताओ नोटिस के साथ उनके बेटे सिद्धार्थ और 5 मंडल अध्यक्षों पर निष्कासन की कार्रवाई शनिवार को राजनीतक गलियारों से लेकर आम नागरिकों के बच चर्चाओं में रही। वही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ से लेकर पूर्व मंत्री अजय विश्नोई तक ने ट्वीट करके इस पर सवाल उठाए।

 दमोह के नवनिर्वाचित विधायक कांग्रेस नेता अजय टंडन ने कोरोना काल में कलेक्टर एसपी के तबादलों को गलत बताते हुए कहा कि नए अधिकारी को इस महामारी भरे काल में दमोह के हालात समझने में समय लगेगा। उन्होंने भाजपा की करारी हार के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान और प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा को जिम्मेदार ठहराते हुए यहां तक कहा कि दमोह में हार के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी भी डोलने लगी है। जिससे हार की जिम्मेदारी जयंत मलैया पर थोप कर वह अपनी कुर्सी बचाने की कोशिश कर रहे हैं।

जयंत मलैया पूर्व में ही दे चुके है आरोपों के जबाव..

उपचुनाव में हार के बाद राहुलसिंह द्वारा पूर्व मंत्री जयंत मलैया व उनके बेटे सिद्धार्थ पर भीतरघात के आरोप लगाते हुए उनके खुद के वार्ड में चुनाव हारने की बात करते हुए शहर में हार के लिए जिम्मेदार ठहराया था। जिसके बाद श्री मलैया ने राहुल के आरोपों का जबाव देते हुए सांसद प्रहलाद पटेल के वार्ड से लेकर पार्टी जिलाध्यक्ष प्रीतम सिंह के वार्ड सहित सभी वार्डो में हार का हवाला देते हुए कहा था कि यह भाजपा की नहीं राहुल की हार है। 

भाजपा संगठन अपने निर्णय पर पुनः विचार करें

दमोह। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व के द्वारा पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया को जारी किए गए नोटिस एवं सिद्धार्थ मलैया और सभी 5 मंडल अध्यक्ष पर की गई निलंबन की कार्यवाही के बाद भाजपा के जिला महामंत्री रमन खत्री एवं पिछड़ा वर्ग मोर्चा के जिलाध्यक्ष कपिल सोनी ने कुछ पत्रकारों के साथ चर्चा करते हुए प्रदेश संगठन से उपरोक्त निर्णय पर फिर से विचार करने का आग्रह किया है। 

महामंत्री रमन खत्री ने कहा कि जयंत मलैया सात बार विधानसभा का नेतृत्व करने के बाद जब 2018 में चुनाव हार गए तो उन्होंने अपनी हार को स्वीकार किया और लोगों के बीच जन हितेषी कार्य करने में लगे रहे। प्रदेश में जब 15 महीने कांग्रेस की सरकार रही तो दमोह मैं प्रदेश नेतृत्व के द्वारा किए गए धरना प्रदर्शन आंदोलन को सफल बनाया। भीतरघात 2018 के चुनाव में भी हुआ था परंतु तब उन्होंने इस तरह की बयानबाजी नहीं की थी जिस तरह की बयान बाजी भाजपा के प्रत्याशी राहुल सिंह ने मतगणना केंद्र के बाहर की जो कि भाजपा की रीतिनीति के खिलाफ है। पार्टी के उक्त निर्णय से दमोह में पार्टी के कार्यकर्ता निराश है। 

इधर भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष कपिल सोनी ने कहा कि जयंत मलैया  एवं सिद्धार्थ मलैया और हमारे पांचों मंडल अध्यक्ष के साथ-साथ दमोह विधानसभा के प्रत्येक कार्यकर्ता ने ईमानदारी से और पूरी निष्ठा से भाजपा के प्रत्याशी श्री राहल सिंह को जिताने का प्रयास किया परंतु जनता में भाजपा का नहीं राहुल सिंह का विरोध था। राहुल सिंह स्वयं कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए और आज वह हमें बता रहे हैं की पार्टी मां होती है जबकि कांग्रेस में उन्हें टिकट देकर विधायक बनाया उन्होंने दमोह की जनता के साथ विश्वासघात किया और वह आज दूसरों पर विश्वासघाती होने का आरोप लगा रहे हैं, वर्तमान में प्रदेश संगठन के द्वारा की गई कार्यवाही से हर कार्यकर्ता निराश है संगठन को अपने निर्णय के बारे में विचार करना चाहिए।

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