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कुण्डलपुर में भव्य मुनि दीक्षा.. आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा लेकर खिमलासा के शालू भैया बने मुनि आदि सागर.. पूज्य आर्यिका संघ का सानिध्य भी मिला.. पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता ने बड़ेबाबा के दर्शन कर आचार्यश्री का आर्शीवाद प्राप्त किया..

 कुण्डलपुर में मुनि दीक्षा, शालू भैया बने मुनि आदिसागर

दमोह। कुण्डलपुर की पावन धरा पर आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के द्वारा शशांक शालू भैया को दिगम्बर जैन मुनि दीक्षा प्रदान की गई। आचार्य श्री ने अपने कर कमलों से मंत्रोचारों के साथ दीक्षा की विधि सम्पन्न की। नवदीक्षार्थी ने अपने हाथों से एक-एक करके अपने वस्त्र आभूषणों को फेंक दिया और सबके सामने दिगम्बर मुद्रा को धारण की। इस अवसर पर आचार्य श्री ने नवदीक्षार्थी मुनि महाराज को  आदिसागर नाम प्रदान किया। इस अवसर पर पूज्य आर्यिका संघ सहित बड़ी संख्या में श्रावकजनों की मौजूदगी रही।

 इसके पूर्व नवदीक्षित मुनिराज ने अपने सभी संस्कारारिक बंधनों का त्याग करते हुए आचार्य श्री के चरणों में मुनि दीक्षा प्रदान करने हेतु निवेदन किया। आचार्य श्री ने माता पिता एवं उपस्थित सभी समाज जनों से दीक्षार्थी को दीक्षा देने हेतु अपनी सहमिती देने का आग्रह किया। सभी समाज जनों ने हर्षित भाव से एक आवाज में अपनी स्वीकृति प्रदान की।

 इस अवसर पर नव दीक्षित मुनि महाराज जी को नवीन पिच्छिका देने का सौभाग्य प्रवीण जैन चंद्रकुमार महावीर ट्ासपोर्ट को प्राप्त हुआ। नया कमण्डल देने का सौभाग्य विपिन जैन परिवार एवं शास्त्र भैंट करने का सौभाग्य सुनील जैन डिण्डोरी को प्राप्त हुआ। नवदिक्षित मुनिराज को जप माला प्रदान करने का सौभाग्य कुण्डलपुर कमेठी के अध्यक्ष संतोष सिघई के परिवार को प्राप्त हुआ।
इस मोके पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने अपने मंगल उदवोधन में कहा कि दीक्षा का अर्थ यही है कि स्वयं को आत्मा से जोड़ना, संयम ही सुख का कारण हैं स्वयं की व्यथा कों मिटाकर रत्नत्रय में डुबना ही दीक्षा है। व्यक्ति जब दुनिया से परिचय बढाया तो स्वयं के परिचय से वंचित हो जाता है। दीक्षा से असंख्यात गुणी निर्जरा होती है। संसार जो दुःख कारण है मिथ्यात्व को तोड़ना आवश्यक है कायर नही कार्यरत बनों वर्तमान ही हमारे हाथ में है जिस तरह दूध का सार मलाई है उसी तरह जीवन का सार दीक्षारूपी मलाई है। सभी इच्छाए कस्तुरी मृग की तरह है। जिसमें मनुष्य जीवन भर भटकता रहता है। सभी को दीक्षा धरण कर अपनी आत्मा का कल्याण कर लेना चाहिए। 

इसके पूर्व आर्यिका पूर्ण मति जी ने कहा कि यह पता नही होता कि कब किसकी काल लब्धि आ जाय और वैराग्य उपज जाय संतो का सानिध्य सौभाग्य से मिलता है। नवदीक्षित मुनिमहाराज को पूर्व में गुरूदेव ने संस्कार दिए। जिसने दृढ़ संकल्प कर लिया वह इतिहास स्वर्ण अक्षर से बना देते है। संयम से बढ़कर कोई कमाई नही होती। मुनि मुद्रा धारण करना किसी चमत्कार से कम नही, यह वही स्थान है जहाॅ पर मुझे आर्यिका के संस्कार आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से प्राप्त हुए थे। आर्यिका श्री ऋजुमति माता जी ने कहा कि नव दीक्षित मुनि अपनी बालक अवस्था में आहार दान और पूजन में बहुत उत्साहित रहते थे। ऐसे भाव चमत्कार ही घटित करते है। इन्होंने हर परिस्थितियों में आहार दान की सेवा की है। मुनि दीक्षा के लिए बहुत पुण्य साहस और गुरू कृपा चाहिए। बालक आज गुरूशरण में महाव्रतों का पालक बन गया।

पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता का कुण्डलपुर कमेटी ने सम्मान किया..

इस अवसर पर कुंडलपुर पहुचे प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ने बड़े बाबा के दर्शन करके निर्माणाधीन मंदिर कार्य का जायजा लिया तथा दीक्षा स्थल पर पहुचकर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज का आर्शीवाद प्राप्त किया। कुण्डलपुर कमेठी ने उनका शाल श्री फल और मोमेण्टो भैंट कर सम्मान किया। इस अवसर पर कुंडलपुर कमेटी की ओर से वैश्य महासम्मेलन के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष कैलाश शैलार सहित अन्य वैश्य बंधुओं का भी स्वागत सम्मान किया गया। 

आज से प्रारम्भ होगा कल्याण मंदिर पार्श्वनाथ विधान

दमोह कुण्डलपुर में आज 25 दिसम्बर से 4 जनवरी तक कल्याण मंदिर पार्श्वनाथ विधान का आयोजन मुनि संघ एवं आर्यिका संघ के मंगल सान्ध्यि में प्रारंभ होगा उपरोक्त जानकारी कुण्डलपुर कमेठी के प्रचार मंत्री सुनील वेजीटेरियन ने प्रदान करते हुए बताया कि विधान के आयोजन हेतु सभी तैयारियॉं पूर्ण कर ली गई विधान में 44 मंडल का निर्माण अति आकर्षक ढंग से  किया गया है। इस विधान का प्रसारण प्रतिदिन दोपहर में 2 बजे से पारस चैनल पर किया जावेगा। कुण्डलपुर कमेठी के अध्यक्ष संतोष सिंघई ने सभी से पूण्यार्जन करने की अपील की है। आयुष जैन की रिपोर्ट

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