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सावधान.. करीब आठ सौ साल बाद मकर राशि में शनि और गुरु का हो रहा है ऐसा अदभुद संयोग.. 21 से 25 दिसंबर के बीच आसमान में बेहद निकट दिखाई देंगे गुरु और शनि.. पं. रविन्द्र शास्त्री देहली से दे रहे है ज्योतिष विषलेशण..

  59 साल बाद दोनों ग्रहों का एक साथ मकर राशि में मिलन 

गुरु और शनि दो बड़े ग्रह इन दिनों मकर राशि में संचार कर रहे हैं। 59 साल बाद इन दोनों ग्रहों का एक साथ मकर राशि में मिलन हुआ है। लेकिन इन सबसे बढ़कर इस बार ऐसा संयोग बनने जा रहा है जो 800 साल बाद घटित होगा। खगोल-विज्ञानियों के अनुसार आगामी 21 दिसंबर से 25 दिसंबर के बीच आकाश में गुरु और शनि बेहद निकट दिखाई देंगे। सामान्यतया लगभग 20 वर्ष के पश्चात ये दोनों बड़े ग्रह एक साथ एक राशि में युति करके आकाश में नजदीक दिखाई देते हैं। 

लेकिन 800 वर्ष के बाद इस बार शनि और गुरु इतने निकट होंगे जितना आज से पहले मार्च 1226 में दिखाई दिए थे। ओर आपको में पहले भी बता चुका हूं की 06 नवंबर 2019 से 24 जनवरी 2020 तक एक साथ धनु राशि में जो कॉरोना महामारी लेकर आया क्योंकि धनु का स्वामी बृह्पति है को हेल्थ का कारक और खाने पीने से संबंधित है पर अब मकर राशि में दोनों का साथ ने और इतना पास होना बहुत ही प्रभाव सली होगा जी 20 नवंबर 2020 से 06 अप्रल 2021 तक साथ रहेगा जो अब 59 साल बाद गुरु का मकर में आना देश दुनिया और आपके लिए कैसा रहेगा

ऐसा होगा गुरु शनि का मिलन’.. 22 दिसंबर सबसे छोटा दिन होने कि वजह से 21 दिसंबर के दिन इस साल शनि-गुरु सबसे निकट होंगे जो कि खगोल-विज्ञानियों के साथ-साथ ज्योतिषियों के लिए भी कौतुहल का विषय होगा।  पांचवीं सदी में लिखे गए मेदिनी ज्योतिष के ग्रंथ बृहत्संहिता में तारा ग्रहों मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि की एक अंशों और क्रांति पर होने वाली युति को ‘ग्रह-युद्ध’ कहा गहा है। सम्राट विक्रमादित्य के राजज्योतिषी वराहमिहिर द्वारा रचित बृहत् संहिता के ‘ग्रह-युद्ध’ अध्याय में कहा गया है कि जब दो ग्रह इतने निकट आ जाएं कि धरती से देखने पर दोनों के बिन्दु एकीभूत हो जाएं तब ‘भेद-युति’ होती है यानी दोनों ग्रहों को नग्न आंखों से देखने पर भेद नहीं किया जा सकता। दोनों का समान अवस्थ में जिस तरह से ग्रहण होता है उसी तरह इन दोनों का प्रभाव उससे बहुत बुरा पड़ सकता है इसी लिए सभी लोग फालतू की अफवाहों पर ध्यान न दें और अपने काम पर ध्यान दें क्योंकि बहुत लोगों की आर्थिक परेशानी बढ़ सकती हैं 

800 वर्ष बाद होगी शनि-गुरु की भेद युति, ऐसा प्रभाव

शनि और गुरु की युति लगभग 20 वर्ष के बाद ही होती है तो इनके बिंबो का अति निकट आना एक विलक्षण घटना है। बृहत् संहिता के अनुसार भेद युति के कारण बड़े मौसमी परिवर्तन होते हैं तथा बड़े घरानों और दलों में फूट पड़ती है। शनि-गुरु की इस भेद युति के कारण अगले एक वर्ष में में बड़े औद्योगिक घरानों और बड़े राजनीतिक दलों में फूट पड़ सकती है। दिसंबर के दूसरे पखवाड़े और जनवरी में सर्दी पिछले कई दशकों का रिकॉर्ड तोड़ेगी। मकर राशि में बन रही शनि-गुरु की भेद-युति इस राशि से प्रभावित क्षेत्र जैसे उत्तर-पश्चिमी भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान में सर्दी के कोप से आम-जनता को बेहद कष्ट देने वाली होगी। इसके साथ-साथ इन देशों में राजनीतिक उठा-पटक और जनांदोलनों की संभावना भी अगले एक वर्ष तक रहेगी। मिथुन राशि से प्रभावित अमेरिका के अष्टम भाव में बन रही शनि-गुरु की भेद-युति वहां की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख देगी जिससे यूरोप के देश भी मंदी की चपेट में आएंगे। वैश्विक मंदी का प्रभाव अगले पांच महीनों तक भारत पर भी गंभीर रूप से दिखाई देगा। पर जनवरी से धीरे धीरे महामारी से भी छुटकारा मिलेगा जो 6 अप्रैल तक 90% कम हो जायेगा,  पूरी तरह इसे अगस्त तक खत्म किया जा सकता है

अधिक जानकारी के लिए और अपने भविष्य के बारे में जानने के लिए सम्पर्क करें..’पं. रविन्द्र शास्त्री’ ’न्यू फ्रैंड्स कॉलोनी माता का मन्दिर न्यू दिल्ली ’7701803003, ’7529934832’

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