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गणेशोत्सव पर गजानन की झाकियो के दर्शन से वंचित भक्त.. कर है प्राचीन गणेश मंदिरों की वंदना.. जबलपुर मार्ग पर नोहटा मैं संगम स्थल, तेजगढ़ में गौरैया नदी तट पर तथा सागर रोड पर झागर के प्राचीन मंदिर में विराजित है अति प्राचीन सिंदूर चोला वाली गणेश प्रतिमाएं..

 संकटो से मुक्ति दाता श्री गणेश का सिंदूरी स्वरूप
दमोह गणेशोत्सव पर्व पर इस बार गजानन की झाकियो के दर्शन से वंचित भक्त प्राचीन गणेश मंदिरों की वंदना करके धर्मलाभ अर्जित करने में जुटे है। जिनमें सिंदूरी गणेश प्रतिमाओं के दर्शन वंदन करने वालों की संख्या सर्वाधिक बताई जा रही है। रिद्धि सिद्धि के दाता प्रथम प्रथम पूज्य श्री गणेश की अनेक प्राचीन प्रतिमाए ऐसी भी जिनको पवन पुत्र हनुमान की तरह सिंदूर चोला अर्पण भी किया जाता है। इनकी पूजा संकट मोचन देव के रूप में करके भक्त सभी मुसीबतों से मुक्ति पाते नजर आते हैं।  दमोह जिले में तीन स्थानों पर प्रथम पूज्य श्री गणेश जी ऐसी ही सिंदूर चोला अर्पण वाली प्रतिमाओं के स्थित स्थापित होने की जानकारी हम आपको इस खबर के जरिए पहुंचा रहे हैं।
 संकट मोचन पवन पुत्र हनुमान की प्रतिमाओं को सिंदूर चोला अर्पण होते हुए आपने अनेक बार देखा होगा लेकिन दमोह जिले में प्रथम पूज्य बुद्धि विनायक श्री गणेश जी की इन प्राचीन प्रतिमा को भक्तगण श्रद्धा भाव के साथ सिंदूर चोला अर्पण करते हुए बब्बा का संबोधन देते नजर आते है। दरअसल पवन पुत्र हनुमान और श्री गणेश ही ऐसे देवता है जिनको नाम के साथ बब्बा का भी संबोधन दिया जाता है। बुंदेलखंड में बाप के बाप यानि दादा को भी बब्बा कहा जाता है वही हनुमान जी व गणेश जी ही ऐसे देवता है जो भक्तों पर जल्द प्रसन्न होकर डबल फल देते है। शायद यही इसी बजह से भक्त उनको भक्ति के साथ गणपति बब्बा और हनुमन्त बब्बा का संबोधन देने से नही चूकते है। यह तीनों प्रतिमाएं अति प्राचीन  अनुपम, अलौकिक अन्य प्रतिमाओं से बिल्कुल अलग तथा सच्चे मन से दर्शन करने आने वालों के लिए मन वांछित फल प्रदाता बताई गई है। जबलपुर मार्ग पर नोहटा मैं संगम स्थल तथा तेजगढ़ में गौरैया नदी तट पर, सागर रोड पर झागर के प्राचीन मंदिर में अति प्राचीन सिंदूर चोला वाली गणेश प्रतिमाएं विराजित है
तेजगढ़ में विराजे है अष्ट भुजाधारी सिंदूरी गणेश..
दमोह जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर राजा तेजी सिंह की प्राचीन नगरी तेजगढ़ में गौरैया नदी के तट पर 8 फीट की प्राचीन गणेश भगवान की प्रतिमा छोटे से मंदिर मे सुशोभित है। यहा की सिंदूरी गणेश प्रतिमा को हर शनिवार को हनुमान जी की तरह सिंदूर चोला अर्पण किया जाता है। प्रत्येक पूर्णिमा पर मंदिर मैं अखण्ड रामायण पाठ होता हैं। पास में ही राजा तेजी सिंह का प्राचीन किला है। जो इस मंदिर को राजा तेजी सिंह के समय अर्थात करीब 500 वर्ष पुराना होने की ओर संकेत करता है। कहा जाता है कि श्री गणेश प्रतिमा यही जमीन से प्रकट हुई थी। जिसे किले में ले जाने का प्रयास किया गया। लेकिन वह टस से मस नहीं हुई जिसके बाद राजा तेजी सिंह ने यही पर मंदिर निर्माण करवाया था। उसी समय से यह घाट गणेश घाट के नाम से प्रसिध्द हो गया। गौरैया नदी में जब कभी बाढ़ आती है तो वह गणेश मंदिर तक पहुंचने के बाद प्रथम पूज्य का वंदन करने के बाद ही वापिस लौटती है। ऐसा अनेक बार हो चुका है। यहां एक और खास बात है यह है कि सिंदूरी चोला वाले मंशा पूरन विघ्नहर्ता संकट मोचन श्री गणेश के अष्ट भुजी जीवंत स्वरूप के दर्शन उन्हीं को मिल पाते हैं जिनको गणपति स्वयं बुलाते हैं। 
1700 वर्ष प्राचीन है नोहटा का श्रीगणेश मंदिर 
दमोह जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर जबलपुर स्टेट हाईवे से पांच मीटर की दूरी पर नोहटा में गौरैया एवं व्यारमा नदी के संगम स्थल पर मलेश्वर में अति प्राचीन धर्म स्थल है। जहां अनेक प्राचीन मूर्तिया पुरा संपदा के रूप में बिखरी  पड़ी है। वहीं यहां स्थित मंदिर में श्री गणेश जी की अति प्राचीन प्रतिमा नृत्य मुद्रा में स्थापित है।श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र 1700 वर्ष प्राचीन यह मंदिर शिल्पकला, आध्यात्मिकता के लिए जाना-जाता है।  मंदिर परिसर में गजराज के समान दिव्य स्वरूप में भगवान की पाषाण प्रतिमा विराज मान है। पास में ही हनुमान जी की सिंदूरी प्रतिमा भी विराजमान है। वहीं प्राचीन वृक्ष के नीचे अनेक पुरानी मूर्तिया रखी नजर आती है जिनमें गणेश जी की भी कुछ प्रतिमाए शामिल है। यहां पर साल भर भक्तों का आना जाना लगा रहता है।
झागर के प्राचीन मंदिर में दिव्य गणेश दर्शन
दमोह सागर स्टेट हाईवे पर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर पथरिया जनपद के झागर गांव में प्रथम पूज्य श्री गणेश की अति प्राचीन प्रतिमा तथा मंदिर स्थित है यहां पर देश के कोने कोने से श्रद्धालु जन आकर दर्शन पूजन करके अपनी आशाओं को फलीभूत करते हैं 10 दिन की गणेश उत्सव पर्व के दौरान कोरोना काल की गाइड लाइन के चलते इस वर्ष यहां पर कोई भी धार्मिक अनुष्ठान आयोजन नहीं किए गए हैं इसके बावजूद भक्तों का सपरिवार यहां आकर दर्शन पूजन अर्चन करने का क्रम लगातार बना हुआ है 
 गणेश चतुर्थी के दिन पथरिया विधायक श्रीमती रामबाई सिंह परिहार में भी यहां पहुंच कर प्रथम पूज्य की आराधना करते हुए जहां क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना की वहीं कोरोना से सभी को मुक्ति मिले ऐसी प्रार्थना भी की।  कोरोना संक्रमण काल में सार्वजनिक स्थानों पर गणेश प्रतिमा स्थापना नही हो पाने की बजह से प्रथम पूज्य की झांकियों के दर्शन से वंचित भक्त सागर तेजगढ़ तथा नोहटा संगम स्थल पहुंच कर श्री गणेश की सिंदूरी स्वरूप बाली प्रतिमाओं के दर्शन वंदन करके इस वर्ष के गणेशोत्सव पर्व को सार्थक बनाना नही भूले। क्योंकि यह वर्ष आने वाले वर्षों के इतिहास में श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के भूमि पूजन वर्ष के तौर पर यादगार बनने जा रहा है। राष्ट्र के विकास और कोरोना संक्रमण से मुक्ति के लिए प्रथम पूज्य को श्रीफल अर्पित करना करना नहीं भूले। तेजगढ़ से धन कुमार विश्वकर्मा, नोहटा से राज दुबे के साथ अभिजीत जैन की रिपोर्ट

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