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टीकमगढ़.. क्रेसरों की डस्ट कर रही खेत में खड़ी फसल को बर्बाद.. बच्चों के स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़.. बिना रायल्टी के यूपी जा रहा माल.. ग्राम नचनवारा के किसानों ने की बेंजा कब्जा हटाने की मांग..

  क्रेसरों की डस्ट कर रही खेत में खड़ी फसल बर्बाद
टीकमगढ़। जिले में जगह-जगह खनिज माफियाओं एवं रेत माफियाओं के काले कारोबार ने जहां शासन को लाखों रूपए राजस्व की हानि अब तक पहुंचाई है, वहीं दबंगों की मनमानी के चलते किसानों की फसलें तबाह होती नजर आ रही हैं। सरकारी जमीनों पर लीज से अधिक कब्जा करने के साथ ही खनिज माफियाओं द्वारा किसानों की जमीनों का बर्बाद किया जा रहा है। किसानों ने लीज की जमीनों का माप करने और बेजा कब्जा हटाने के साथ ही क्रेसर के कारोबारियों की मनमानी पर अंकुश लगाए जाने पर जोर दिया है। 
 प्रशासन द्वारा रेत माफियाओं और खनिज कारोबारियों पर अंकुश लगाने के भले ही लाख प्रयास किए जा रहे हों, लेकिन अब तक इसके संतोष जनक परिणाम सामने नहीं आ रहे हैं। सुविधा शुल्क के प्रभाव में आए प्रशासन के कतिपय अधिकारी एवं कर्मचारियों ने किसानों की परेशानियों एवं सरकारी जमीन पर हो रहे बेजां कब्जे का दरकिनार कर रखा है। देखा जा रहा है कि जिले में क्रेसर मालिकों द्वारा कई स्थानों पर लीज से अधिक सरकारी एवं किसानों की भूमि पर कब्जा कर रखा है। इतना ही नहीं इस संबन्ध में आने वाली शिकायतों की अनदेखी करना प्रशासन के लिए आम बात हो गई है। किसानों का कहना है कि गरीब और कमजोर तबके के लोगों की जमीनें क्रेसर की मिट्टी और धूल से बर्बाद हो गई है। इतना ही नहीं लोगों के घरों में भी ब्लास्टिंग के कारण दरारें आ चुकी हैं। गरीबों के दरकते मकानों एवं बर्बाद होती फसलों के बाद भी वह अपना मुंह खोलने के बचते आ रहे हैं। दबंगों के आगे किसानों की बोलती बंद है, और वह सब कुछ सहने को मजबूर हैं। 
प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए की वह ग्रामीण इलाकों में मनमाने तरीके से चल रहे क्रेसरों की जांच कर अवैध कब्जा धारियों के विरूद्ध कार्रवाई करें, जिससे सरकारी जमीन पर किए गए बेजा कब्जे का हटाने के साथ ही दबे कुचले कमजोर लोगों को न्याय मिल सके। ग्राम नचनवारा सहित आस-पास के इलाकों में ही अनेक क्रेसर संचालित हैं, इसके साथ ही अनेक क्रेसरों के आस-पास किसानों की फसलें तबाह होती नजर आने लगी हैं। नचनवारा ग्राम के किसानों में लखन कुशवाहा, पप्पू आदिवासी एवं रमेश आदिवासी सहित अनेक किसानों ने बताया कि क्रेसरों की मिट्टी और कंकड़ ने फसलों को बर्बाद करके रख दिया है। इसके साथ ही यहां क्रेसर पर होने वाली ब्लास्टिंग के कारण अनेक गरीबों के मकान तबाह हो चुके हैं। यहां तीन क्रेसर लगे हुए हैं, जिनमें अधिकांश मालिकों ने लीज से अधिक जमीन पर कब्जा कर रखा है। किसानों ने आरोप लगाया है कि यहां प्रशासन की मौन स्वीकृति के कारण क्रेसर मालिकों ने निर्धारित मापदंड से अधिक खुदाई कर डाली है और किसानों के मकान और खेतों को बर्बाद कर रखा है।
मासूम बच्चों के कानों पर पडऩे लगा असर-ग्राम नचनवारा ही नहीं इसके अलावा भी जहां बस्तियों के आस-पास क्रेसर लगे हुए हैं, यहां ब्लास्टिंग के कारण मासूम बच्चों के कानों पर असर पडऩे लगा है। कहा गया है कि यदि नचनवारा के बच्चों का डाक्टरी परीक्षण कराया जाए, तो यहां अनेक बच्चों के बहरे होने के मामले सामने आएंगे। बच्चों को कम सुनाई देने लगा है। क्रेसरों के आस-पास बनें मकानों की दीवारें दरकने लगी हैं। किसानों में लखन कुशवाहा सहित अनेक लोगों ने प्रशासन से इस दिशा में ठोस कदम उठाने पर जोर दिया है, जिससे मासूमों के स्वास्थ्य पर पड़ते असर को रोका जा  सके। यहां के बच्चों पर मिट्टी और धूल का भी गहरा प्रभाव पड़ता नजर आने लगा है।
बिना रायल्टी के यूपी जा रहा माल.. नचनवारा सहित आसपास के क्रेसरों से रायल्टी चोरी के मामले भी सामने आने लगे हैं। कहा जा रहा है कि यहां लगे क्रेसरों से एक ओर जहां किसानों और गरीबों की चिंता बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर सरकार को चूना लगाए जाने के मामले भी सामने आ रहे हैं। किसानों का कहना है कि यहां बिना रायल्टी के यूपी के विभिन्न इलाकों में माल भेजा जा रहा है। क्रेसर से भेजी जाने वाली गिट्टी और बालू बिना रायल्टी के ही सीमापार भेजी जा रही है, जिससे सरकार को बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। इस कारनामें में अधिकारियों से सांठगांठ होने की चर्चाएं आम होने लगी हैं।
उपरोक्त हालात को लेकर टीकमगढ़ के खनिज अधिकारी प्रशांत तिवारी का कहना है कि नचनवारा में तीन क्रेसर संचालित हैं, इस संबन्ध में अब तक कोई शिकायत विभाग तक नहीं आई है। यदि क्रेसर संचालकों द्वारा रायल्टी चोरी की जा रही है, या किसी तरह की गड़बड़ी की जा रही है, तो इस मामले की जांच की जाएगी। जो दोषी पाये जाते हैं, उनके विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। टीकमगढ़ से लोकेंद्र सिंह परमार की रिपोर्ट

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