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खतरनाक मंजर.. रेलवे ट्रैक पर पड़े शव की इंक्वारी करती पुलिस, जान जोखिम में डाले खड़े लोग और शव के ऊपर से धड़धड़ाती निकलती मालगाड़ी..

रेलवे ट्रैक पर पड़ा शव और ऊपर से निकलती मालगाड़ी-
दमोह। रेलवे ट्रैक के ऊपर होने वाले हादसों के बाद पुलिस की पंचनामा कार्रवाई में लगने वाले समय तथा पटरियों के आसपास जान जोखिम में डालने वालो  की भीड़ तो अक्सर देखने को मिल जाया करती है लेकिन रेल ट्रेक के बीच पड़े शव और पटरियों के ऊपर से एक के बाद एक ट्रेनों का धड़धड़ाते हुए  निकलते जाना किसी खतरनाक खौफनाक मंजर से कम नहीं है।
दमोह के फुटेरा रेलवे फाटक के समीप यह वीडियो मंगलवार 2 अप्रैल की है। वीडियो में साफ नजर आ रहा है रेलवे ट्रेक के बीच में किसी व्यक्ति का शव पड़ा हुआ है। रेलवे लाइन पर लोगों की भीड़ एकत्रित हो रही है। पुलिस का दरोगा रेलवे ट्रैक के किनारे बैठकर लिखा पढ़ी में जुटा हुआ है। लोगों की भीड़ उसे घेरे हुए हैं। अचानक रेल इंजन के सायरन की आवाज आती है और लोग पटरियों के बीच से साइड में होने लगते हैं।
कुछ ही पलों में करीब 80-90 की रफ्तार से मालगाड़ी उसी रेलवे ट्रैक के ऊपर से निकलती जाती है जिसके बीच मे शव पड़ा हुआ है। महज 40-45 सेकंड में मालगाड़ी के करीब 60-70 डब्बे पटरियों के ऊपर से गुजर जाते हैं। और फिर रेल ट्रक के बीच पढ़ा हुआ शव नजर आने लग ता है। लोगों की भीड़ फिर से पटरियों पर जुटने लगती है। पुलिस इंक्वायरी के दौरान ऐसे नाजारे एक नहीं अनेक बार देखने को मिले। गनीमत यह रही कोई दूसरा हादसा नहीं हुआ।
बीना कटनी रेल खंड के व्यस्ततम ट्रैक पर पढ़े इस शव की पहचान फुटेरा वार्ड निवासी गोविंद रैकवार के तौर पर की गई थी। मानसिक रूप से कमजोर गोविंद की मौत रेलवे ट्रैक पर हो जाने के बाद परिजनों ने इसकी सूचना पुलिस को दी थी। काफी देर बाद पुलिस जब मौके पर पहुंची तो लोगों की भीड़ लगी हुई थी। रेल पटरियों के किनारे पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को उठवा कर पोस्टमार्टम हेतु भेजने के लिए स्वीपर का इंतजार भी किया जाता रहा। 
 इस दौरान दोनो तरफ के रेल ट्रेक से गाड़ियों का आना जाना लगा रहा और लोग हर बार दाएं बाएं होते रहे। ऐसे में यदि थोड़ी सी लापरवाही हो जाती और कोई व्यक्ति दूसरी गाड़ी की चपेट में आ जाता तो इसका जिम्मेदार किसे ठहराया जाता। सवाल जितना आसान है जवाब उतना ही मुश्किल। वीडियो में देखने से ही जब यह मंजर खौफनाक खतरनाक नजर आता है तो आसपास मौजूद लोगों की क्या मनो स्थिति रही होगी अंदाजा लगाया जा सकता है। 
इतना सब कुछ लिखने का आशय यही है कि रेलवे ट्रैक पर होने वाले हादसों के बाद पुलिस पंचनामा कार्यवाही और ट्रेक से शव हटवाने में अधिक विलंब ना करें। तथा मृतक के परिजन परिचित व अन्य लोग रेल ट्रक पर इस तरह से भीड़ ना लगाएं कि उनको भी हादसे का शिकार होना पड़े या उनके भी हादसे की आशंका निर्मित हो जाए। अभिजीत जैन की रिपोर्ट

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