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बाबा को मनाने में जुटे बड्डा.. दिलाया पथरिया से टिकट का भरोसा, बाबा निर्दलीय लड़ने पर अड़े, कहा सरताज की टिकट का भी गम

बाबा को मनाने सामाजिक स्तर पर सक्रियता बड़ी-
दमोह तथा पथरिया से निर्दलीय नामांकन दाखिल करके बुंदेलखंड सहित प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा देने वाले बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बाबा जी को मनाने के लिए पथरिया से टिकट का ऑफर भी आने लगा है इसके बावजूद बाबा जी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर ही मैदान में डटे रहने की बात दोहराई है।


पूर्व मंत्री कुसमरिया द्वारा दोनों ही क्षेत्रों से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने के लिए अड़ जाने के बाद उन्हें मनाने के लिए आज भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने भी फोन लगाया। बाबा से बात नही हो पाने पर उन्होंने पूर्व सांसद चंद्रभान सिंह को उनके पास भेजा। लेकिन व्यस्तता के कारण तब भी बाबा से उनकी बात नहीं हो सकी। इसके बाद बाबा जी को मनाने की जिम्मेदारी उनको भड़काने वाले बड्डा को सौंपी गई है।


रविवार रात कुर्मी समाज के वरिष्ठ लोगों के साथ बाबा जी को मनाने के लिए लगी चौपाल में देर तक विचार विमर्श का दौर चलता रहा। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष  शिवचरण पटेल ने सामाजिक स्तर पर भी एकता का हवाला देकर बाबा को पथरिया से  पार्टी टिकट  दिलाने का भरोसा दिलाकर मनाने का प्रयास किया। परंतु लगातार उपेक्षा से दुखी बाबा जी सबकी सुन के निर्दलीय चुनाव लड़ने की बात करते रहे।
सरताज की टिकिट कटने के सदमे में हैं बाबाजी-

बाबा जी को अपनी टिकट कटने के साथ साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता अटल जी की 13 दिन की सरकार में मंत्री रहे सरताज सिंह की टिकट कटने का भी बहुत अधिक गम है। पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह को मात देने वाले सरताज सिंह तथा उन्हें स्वयं टिकट नहीं देने पर बाबाजी का यहां तक कहना था कि यदि उन दोनों को पार्टी टिकट दे देती तो कोई आसमान नहीं फट जाता। उन्होंने दमोह तथा पथरिया दोनों जगह से अपनी जीत का दावा भी किया।
अब लखन पर नाम वापसी का बन सकता है दबाव-

बागी बाबा कुसमरिया द्वारा दोनों क्षेत्रों में चुनाव प्रचार शुरू कर देना तथा निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में रहने से जिले की चारों सीटों के अलावा बुंदेलखंड के अन्य क्षेत्रों में भी भाजपा के लिए नुकसान होने की संभावना किसी से छिपी नहीं है ऐसे में बाबा को मनाने के लिए पथरिया से प्रत्याशी घोषित किए जाने तथा लखन पटेल पर नाम वापसी का दबाव पार्टी के अलावा सामाजिक स्तर पर भी यदि बनाया जाता है तो अब किसी को आश्चर्य नहीं होगा। अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट

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