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बुंदेलखंड में बगावत के सुर तेज.. बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष कुसमरिया भी भरेंगे निर्दलीय नामांकन..

पथरिया व दमोह से निर्दलीय नामांकन का ऐलान -
दमोह। बुंदेलखंड में भाजपा के टिकट वितरण के साथ सिटिंग एमएलए के टिकट काटे जाने के बाद बढ़ता आक्रोश अब पूर्व प्रत्याशियों के बीच में भी तेज हो चुका है। जगह जगह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किए जाने के एलान के बीच बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रामकृष्ण कुसमरिया ने पथरिया व दमोह से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन दाखिल करने का ऐलान कर दिया है।
 बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पूर्व सांसद व पूर्व मंत्री डॉ रामकृष्ण कुसमरिया बाबाजी का पार्टी की उपेक्षा को लेकर आखिरकार दर्द फूट पड़ा। उन्होंने भरे मन से आज इस बात का ऐलान कर दिया कि पार्टी ने उन्हें विधानसभा की टिकट नहीं दी तो वह पथरिया तथा दमोह से भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर कल नामांकन पत्र दाखिल करेंगे।
दमोह के एसपीएम नगर स्थित कुसमरिया निवास पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए पूर्व मंत्री कुसमरिया ने भाजपा हाईकमान द्वारा उपेक्षा किए जाने तथा चयन समिति में होने के बाद भी टिकट वितरण के मामले में पूछ परख नहीं किए जाने तथा उनकी पुरानी सीट पथरिया से भी उनकी टिकट काट दिए जाने जैसे मामलों को लेकर खुलकर अपना दर्द बयान किया। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल के जरिए उन्होंने अपनी बात पार्टी संगठन तक पहुंचाने का प्रयास किया। इसके बाद भी गंभीरता से नहीं लिया गया।
बाबाजी जब अपनी बात पत्रकारों के समक्ष कर रहे थे उस दौरान उनके एक तरफ दमोह भाजपा के पूर्व जिला आध्यक्ष विद्यासागर पांडे तथा दूसरी ओर पूर्व महामंत्री किशोर अग्रवाल विराजमान थे। पीछे के कमरे में जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल डटे हुए थे। बाबा जी ने भरे मन से पहले पथरिया से दो नामांकन भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जमा करने की बात कही इसके बाद दोनों ने दमोह से भी निर्दलीय नामांकन पत्र जमा करने की बात कही।
   उन्होंने बिना किसी का नाम लिए हुए कहा कि लगातार उनके खिलाफ षड्यंत्र किए जाते रहे हैं। पहले उनकी दमोह लोकसभा से टिकट कटवा कर खजुराहो भेजा गया। लेकिन वो वहां से भी जीतकर आ गए।  पथरिया से विधायक बनकर कृषि मंत्री बने तो षड्यंत्र पूर्वक पिछली बार उनकी टिकट कटवा राजनगर भेज दिया गया। इस बार समर्थकों के दबाव में जब उन्होंने पुनः दावेदारी की बहन मौके पर उनकी टिकट पर काट दी गई।
 जिस तरह से बाबा जी बार बार अपनी बात को बदलते नजर आए उसे देख कर यह भी महसूस हुआ कि कोई उनके कंधे का उपयोग अपनी राजनीतिक गोटिया फिट करने के लिए कर रहा है। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल की उनके बंगले पर मौजूदगी तथा मीडिया के सामने चुप्पी इस बात का संकेत करती नजर आई कि कहीं ना कहीं वह भी बाबा जी के कंधे पर बंदूक रखकर  निशाना साध रहे हैं।
बता दें कि सांसद प्रहलाद पटेल के साथ भी इसी तरह की जुगलबंदी करने वाले शिवचरण कब पाला बदलकर कहा पहुंच जाएं इसका पता नहीं चलता। कुछ दिन पूर्व भाजपा के प्रदेेश मंत्री ऋषि लोधी के खिलाफ भी एक शिकायती पत्र सार्वजनिक करने वाले शिवचरण कब किस नेता को क्या गुल खिला दें इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।
फिलहाल जिस तरह बाबा जी ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल करने की बात कही है, उससे साफ समझ में आ रहा है कि इसके पीछे कौन उकसा रहा है। इसके बाद भी यदि वह निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर लड़ने का साहस दिखा पाते हैंं तो शायद वह नेता भी उनकेे साथ में खड़े नजर नहीं आएंगे जो आज बंगले पर पर्दे के पीछे रहकर उनके शुभचिंतक बनने का दिखावा कर रहे थे । अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट

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