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दमोह से कुसमरिया बाबा को टिकिट की खबर से कांग्रेसी खेमे में सन्नाटा.. प्रताप के प्रताप की भी अनदेखी.. ! कमलनाथ की जिद के चलते कमल वाले वॉकोवर मिलने जैसे फीलगुड में ..

 कुसमरिया और प्रताप के बीच कांग्रेस टिकिट की रेस- 
दमोह। संसदीय क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार कद्दावर नेता पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को प्रत्याशी घोषित करके उनको पूरे क्षेत्र में चुनावी तैयारी के साथ लोगों से गिले-शिकवे दूर करने का अवसर प्रदान कर दिया है। इधर कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री कमल नाथ की पहली पसंद बने पूर्व सांसद रामकृष्ण कुसमरिया को टिकिट की खबर से कांग्रेसी खेमे में सन्नाटा छाया हुआ है। तथा अनेक लोग इस निर्णय को भाजपा को वाकोवर देने जैसा बताने से भी नही चूक रहे है।
 मध्य प्रदेश की विभिन्न लोकसभा क्षेत्रों में प्रत्याशी चयन के मामले में पिछड़ी कांग्रेस चयन समिति दमोह संसदीय क्षेत्र के लिए भी पार्टी प्रत्याशी के नाम की घोषणा जल्द करने जा रही है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूर्व मंत्री रामकृष्ण कुसमरिया और जबेरा के पूर्व विधायक प्रताप सिंह लोधी में से किसी एक नाम की घोषणा आज दमोह क्षेत्र के लिए की जा सकती है। 
सूत्रों का कहना है कांग्रेस चयन समिति से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारी संसदीय क्षेत्र की 8 में से 6 सामान्य सीटों में से 4 पर लोधी समाज के विधायक चुने जाने तथा
भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद सिंह पटेल के भी लोधी समाज से होने कांग्रेस से भी लोधी चेहरे पर दांव लगाने के पक्ष धर थे। कांग्रेस से लोधी समाज से जिन नेताओं के नामों पर विचार चल रहा था उनमे पूर्व विधायक प्रताप सिंह, दमोह विधायक राहुल सिंह, मलहरा विधायक प्रदुमन सिंह, राज्यसभा सदस्य विवेक तंखा के नजदीकी वैभव सिंह एवं सांसद प्रह्लाद पटेल के चुनाव लड़ने पर रोक की याचिका  सुप्रीम कोर्ट में दाखिल करने वाली महिला नेत्री जया ठाकुर के नाम प्रमुख थे। 
परंतु प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मुख्यमंत्री कमलनाथ किसी भी वर्तमान विधायक को टिकिट के पक्ष में नहीं थे। वहीं उन की रॉय नए चेहरों पर दांव लगाने के बजाय पुराने वरिष्ठ नेताओं के पक्ष में रही। जिससे आखरी दौड़ में बाबाजी और प्रताप के नाम ही शेष बचे है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कमलनाथ की पहली पसंद बाबा जी रामकृष्ण कुसमरिया बने हुए हैं तथा वह इनको हर हाल में दमोह से लोकसभा टिकट दिलाने के लिए जोर लगा रहे हैं। शायद यही वजह है कि आज घोषित होने वाली कांग्रेस की सूची में कुसमरिया बाबा का नाम कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर सामने आ सकता है। इधर बाबाजी को कांग्रेस प्रत्याशी घोषित किए जाने के पहले दमोह कांग्रेस पदाधिकारियों टिकट के दावेदार नेताओं के बीच खामोशी छाई हुई है। 
वहीं सोशल मीडिया पर बाबाजी को बधाइयां देने का दौर भी शुरू हो गया है। हालांकि बाबाजी के नाम की घोषणा होने के पहले ही अनेक नेता इसे आत्मघाती फैसले कि संज्ञा देते नजर आ रहे हैं। दरअसल दमोह संसदीय क्षेत्र से पूर्व में भी कांग्रेस के द्वारा भाजपा छोड़ने वाले पूर्व सांसद चंद्रभान सिंह पर दांव लगाया जा चुका है। चंद्रभान सिंह के लोधी समाज से होने तथा आर्थिक रूप से बेहद सक्षम होने के बावजूद भाजपा के साधारण प्रत्याशी शिवराज सिंह लोधी के मुकाबले इनकी हार का अंतर लाखों वोटों का रहा था। इसकी एक वजह कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा दूसरे दल से आए प्रत्याशी के पक्ष में पूरे जोशो खरोश और मनोबल से कार्य नही कर पाना भी बताया गया था।  बाबा जी के साथ भी ऐसी ही स्थिति निर्मित होने की बात दबी जुबान से कांग्रेसियों द्वारा जताई जा रही है।
इधर कांग्रेस पैनल में दूसरे नंबर पर चल रहे पूर्व विधायक प्रताप सिंह लोधी को बाबाजी के मुकाबले बेहतर  प्रत्याशी कांग्रेसी मान रहे है।  लेकिन भाजपा सांसद और प्रत्याशी प्रहलाद पटेल के मुकाबले यह कहा तक कारगर होंगे इसमे भी शंका जताई जा रही है। दरअसल 4 महीने पूर्व हुए विधान सभा चुनाव में सांसद प्रहलाद पटेल की कुशल रणनीति के कारण भाजपा के नए नवेले प्रत्याशी धर्मेंद्र सिंह ने प्रताप सिंह को करारी मात देकर सबको चोंका दिया था। इनके अलावा आर्थिक रूप से सक्षम किसी युवा तुर्क पर यदि कांग्रेस अंतिम समय में दांव लगाती है तो किसी चमत्कार की आशा की जा सकती है।
अन्यथा बाबाजी को कांग्रेस टिकट मिलने पर भाजपा प्रत्याशी प्रहलाद पटेल के घर बैठे चुनाव जीतने जैसे हालात बन जाने की बात करने से भी राजनैतिक पंडित नही चूक रहे है। वैसे भी जिस तरह से पिछले कुछ दिनों से भाजपा सांसद प्रहलाद पटेल सभी के बीच जाकर गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। जिसे देख कर कहा जा सकता है कि चुनाव की रेस में कमजोर प्रत्याशी के जरि प्रहलाद पर पार पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा। अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट

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